शुक्रवार, 30 मई 2014

मां को पढऩा नहीं आता 

मां को पढऩा नहीं आता, 
पर दिल में क्या है मेरे हर बात पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता, 
पर लाखों की भीड़ में मेरी आवाज पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता, 
पर मेरे हर सपने हर ख्वाब पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता, 
पर मेरे हर ज्जबात पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता, 
पर वो जिंदगी के हर सवाल पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता, 
पर मन में छूपे मेरे हर राज पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता, 
पर मेरे अच्छे दिन और बुरी रात पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता,
पर वो बचपन की सारी मेरी याद पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता,
मां भावनाओं की हर किताब पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता,
वो खुशियों की हर सौगात पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता,
मां जिंदगी के हर साज पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता,
पर जीवन के नए राग गढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता,
पर वो रिश्तों में एक मिठास भर देती है
मां को पढऩा नहीं आता,
पर नित नये उल्लास भर देती है
मां को पढऩा नहीं आता,
पर मां हर काम कर लेती है
मां को पढऩा नहीं आता,
पर मां आंसूओं के दाम लेती है
मां को पढऩा नहीं आता,
पर मां भावनाओं की हर किताब पढ़ लेती है
मां को पढऩा नहीं आता,
पर मां पूरा जहान पढ़ लेती है
 पढऩा मुझे आता है और पढऩा मेरी लाचारी है
किताबें बनीं हैं सीढ़ीयां, जिसकी छत बेरोजगारी है
मां तुझे पढऩा नहीं आता, पर शिक्षा मेरी तुझसे है
मां को पढऩा नहीं आता,
मेरी मां मुझे जां से भी प्यारी है
बजरंग यादव (बी-२)
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